श्रीभक्तमाल - भक्तमाल परमभागवत श्रीनाभादासजी महाराजकी काव्यमयी रचना है। इसमें चारों युगों, विशेषकर कलियुगके भक्तोंका बड़े ही रोचक ढंगसे वर्णन हुआ है। सन् २०१३ ई० में कल्याणके विशेषांकके रूपमें भक्तमाल-अंकका प्रकाशन हुआ। विशेषांककी पृष्ठ-संख्या सीमित होनेके कारण उसमें भक्तोंकी कथाको अत्यन्त संक्षेपमें ही देना पड़ा। अब भगवत्कृपासे यथासम्भव विस्तृत व्याख्याके साथ भक्तमालको ग्रन्थरूपमें पाठकोंके समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
श्रीभक्तमाल - भक्तमाल परमभागवत श्रीनाभादासजी महाराजकी काव्यमयी रचना है। इसमें चारों युगों, विशेषकर कलियुगके भक्तोंका बड़े ही रोचक ढंगसे वर्णन हुआ है। सन् २०१३ ई० में कल्याणके विशेषांकके रूपमें भक्तमाल-अंकका प्रकाशन हुआ। विशेषांककी पृष्ठ-संख्या सीमित होनेके कारण उसमें भक्तोंकी कथाको अत्यन्त संक्षेपमें ही देना पड़ा। अब भगवत्कृपासे यथासम्भव विस्तृत व्याख्याके साथ भक्तमालको ग्रन्थरूपमें पाठकोंके समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।